Ken-Betwa Link Project- KBLP

Ken-Betwa Link Project- KBLP

सुर्ख़ियों में- Ken-Betwa Link Project- KBLP
  • हाल ही में कुछ पर्यावरणवादियों ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री के समक्ष ‘केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना’ के संदर्भ में अपना विरोध जताया है क्योंकि, इस परियोजना’ से ‘पन्ना टाइगर रिजर्व’ के एक बड़े क्षेत्र का नुकसान होगा।
  • एक अनुमान के अनुसार ‘केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना’ से ‘पन्ना टाइगर रिजर्व’ का लगभग 40 प्रतिशत इलाक़ा नष्ट हो जाएगा।
  • हाल ही में कुछ दिन पूर्व मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों द्वारा केन-बेतवा लिंक परियोजना को लागू करने हेतु एक समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किये गये थे।
Samyak IAS

केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना-
केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना क्या है?
  • यह देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना है। इसे अंतरराज्यीय नदी स्थानांतरण मिशन हेतु एक मॉडल परियोजना के रूप में माना जाता है।
  • यह राष्ट्रीय नदी विकास एजेंसी (एनडब्ल्यूडीए) द्वारा देश में प्रस्तावित 30 नदी जोड़ो परियोजनाओं में से एक है।
  • इस नदी जोड़ो परियोजना के तहत 77 मीटर लंबा और 2 किमी. चौड़ा दौधन बांध एवं 230 किलोमीटर लंबी नहर का निर्माण कार्य शामिल है।
केन नदी:-
  • उद्गम- मध्य प्रदेश स्थित कैमूर की पहाड़ी से
  • लम्बाई- लगभग 427 किलोमीटर
  • सहायक नदियाँ- उर्मिल नदी, सुनार नदी
  • विलीन- उत्तर प्रदेश के बांदा में यमुना में
बेतवा नदी:-
  • उद्गम- मध्य प्रदेश के रायसेन जिले से
  • लम्बाई- लगभग 576 किलोमीटर
  • सहायक नदियाँ- जामनी नदी, धसान नदी
  • विलीन- उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में यमुना में मिल जाती है।
परियोजना का उद्देश्य-
  • केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना का उद्देश्य उत्तर प्रदेश के सूखाग्रस्त बुंदेलखंड क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने हेतु मध्य प्रदेश की केन नदी के अधिशेष जल को बेतवा नदी में हस्तांतरित किया जाना है।
  • वर्तमान में इस सूखाग्रस्त क्षेत्र में उत्तर प्रदेश के झाँसी, बांदा, ललितपुर और महोबा ज़िलों तथा मध्य प्रदेश के टीकमगढ़, पन्ना और छतरपुर जिले आते है।
Samyak IAS

परियोजना की लागत-
  • इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 45000 करोड़ रुपयें है।
परियोजना से होने वाले लाभ-
  • इस परियोजना से सूखाग्रस्त बुंदेलखंड क्षेत्र में पीने के पानी की समस्या दूर होगी।
  • सूखाग्रस्त बुंदेलखंड क्षेत्र में आर्थिक समृद्धि आएगी और लाखों परिवारों की आर्थिक बदहाली दूर होगी। इससे इस क्षेत्र से होने वाले प्रवास में कमी आयेगी।
  • इस नदी जोडों परियोजना से बुंदेलखंड क्षेत्र में सूखे की समस्या का स्थायी समाधान निकल सकेगा।
  • इस नदी जोडों परियोजना से बुंदेलखंड क्षेत्र के सिंचित रकबे में वर्तमान के मुकाबले उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
  • उत्तरप्रदेश और मध्य प्रदेश के इलाकों को जल ऊर्जा के रूप में सस्ती एवं स्वच्छ ऊर्जा प्राप्त हो सकेगी।
  • बुंदेलखंड क्षेत्र में नहरों का विकास होगा।
  • बुंदेलखंड क्षेत्र में टूरिस्ट स्पॉट में वृद्धि होगी जो एक अतिरिक्त आय का स्रोत होगा।
  • भूमिहीन कृषि मजदूरों के लिये रोज़गार के तमाम अवसर पैदा होंगे, जो आर्थिक विकास को एक नई दिशा प्रदान करेगे।
परियोजना से संबंधित समस्याएँ या चुनौतियाँ-
  • यह परियोजना विसंगतियुक्त जल विज्ञान और जल प्रबंधन की पुरानी समझ पर आधारित है। जिसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते है।
  • परियोजना के कार्यान्वयन से उत्पन्न विस्थापन के कारण पुनर्निर्माण और पुनर्वास के साथ इसमें सामाजिक लागत बढ़ेगी।
  • नदी एक संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र होता है और इसमें लाया जाने वाला बदलाव सभी वनस्पतियों और जीवों को प्रभावित करेगा।
  • इस परियोजना के कारण कृषि पैटर्न में बदलाव आ सकता है जिसके चलते यहाँ के पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
  • परियोजना के कार्यान्वयन और रखरखाव के साथ एक बड़ी आर्थिक लागत जुड़ी हुई है, जो परियोजना को नकारात्मक अर्थों में पेश करती है।
  • केन-बेतवा परियोजना, पन्ना टाइगर रिज़र्व में संभावित अतिक्रमण को बढ़ावा देगी।
  • वर्तमान में इस परियोजना के साथ निम्न प्रश्न बने हुए हैं- कौन सा पानी किसका है? नदी-समुद्र का पानी किसका है? सरकार का नदियों एवं तालाबों के जल पर मालिकाना अधिकार है या सिर्फ़ रख-रखाव की ज़िम्मेदारी?
नेशनल रिवर लिंकिंग प्रोजेक्ट (NRLP)-
  • NRLP को औपचारिक रूप से ’नेशनल पर्सपेक्टिव प्लान’ के रूप में जाना जाता है।
  • इसका उद्देश्य अंतर-बेसिन जल हस्तांतरण परियोजनाओं के माध्यम से जल ‘अधिशेष’ बेसिन, जहाँ जल की मात्रा अधिक है, से जल की कमी वाले ‘बेसिन’ में जल का हस्तांतरण करना है, ताकि सूखाग्रस्त एवं कम वर्षा वाले क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता बढ़ाकर, ऐसे क्षेत्रों में पानी का अधिकाधिक वितरण सुनिश्चित किया जा सके।
  • इन परियोजना का प्रबंधन राष्ट्रीय जल विकास एजेंसी द्वारा किया जाता है।
  • राष्ट्रीय जल विकास एजेंसी द्वारा औचित्यपूर्ण रिपोर्ट तैयार करने हेतु वर्तमान में 30 लिंक्स की पहचान की गयी है। इनमें प्रायद्वीपीय क्षेत्र में 16 और हिमालयी क्षेत्र में 14 लिंक्स होगे, जो निम्न है-


निष्कर्ष-
  • यह नदी जोड़ो परियोजना जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न होने वाले जल संबंधित मुद्दों को हल करने का एक अवसर है। ऐसे में नदी जोड़ो परियोजना वरदान साबित हो सकती है।
  • हालाँकि ज़रूरी यह भी है कि इसे तब अमल में लाया जाए, जब विस्तृत अध्ययन द्वारा यह प्रमाणित हो कि इससे पर्यावरण या जलीय जीवन के लिये कोई समस्या पैदा नहीं होगी।