Oath of Mahatma Gandhi ( महात्मा गांधी जी के संकल्प )

Oath of Mahatma Gandhi
Oath of Mahatma Gandhi

(Mahatma Gandhi’s intentions were very strong Whatever resolutions he took in his life, he completed till his death.)

महात्मा गांधी जी ने जब भी संकल्प लिया वो हार हाल में पूरा किया

महात्मा गांधी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। करमचंद उनके पिता का नाम था। महात्मा गांधी के इरादे बहुत ही मजबूत हुआ करते थे। उन्होने अपने जीवन में जो भी संकल्प लिया उसे मरते दम तक पूरा किया। सन् 1888 में महात्मा गांधी जी लंदन में सूट में दिखे फिर 33 साल बाद सन् 1921 में मदुरई में धोती में और इसी के चलते हुए गांधी जी नें अपने कपडो के जरिये देषभर में सत्याग्रह आन्दोलन की नींव रखी।

महात्मा गांधी जी के सबसे महत्वपूर्ण एवं अहम 5 संकल्प इस प्रकार है।

  1. अप्रेल 1917 में महात्मा गांधी जी ने जूता नही पहनने की शपथ ली
    1917 में महात्मा गांधी जी काठियावाडी पोषाक में चंपारण पहुंचे थें। वहां महिलाओं ने गांधी जी को बताया की अंग्रेजी हुकूमत उन्हे निल की खेती करने के लिए मजबूर करती है। और उन्हें अंग्रेजों की मिडवाइफ की संज्ञा दी जाती है। और अंग्रेजी हुकूमत उन्हें जूते तक नही पहनने देती है। तब महात्मा गांधी जी आजीवन जूते न पहनने की शपथ ली थी।
  2. नवंबर 1917 में महात्मा गांधी जी ने महिलाओं को चोगा देकर त्यागा
    8 नवंबर 1917 को महात्मा गांधी जी ने अपनी पत्नी कस्तूरबा के सहयोग से चंपारण की महिलाओं को साफ सुथरा रहने की सलाह दी। इसमें से एक महिला ने कस्तूरबा से कहा की मेरे पास सिर्फ एक ही साडी है जो की मैने पहन रखी है। बताइये इसे कैसे साफ करू यह बात जब गांधी जी ने सुनी तो उस महिला को चोगा भिजवा दिया। और फिर आजीवन यह कपडा नहीं पहना।
  3. मार्च 1918 में महात्मा गांधी जी ने काठियावाडी पगडी का त्याग कर दिया और कहा इससे 4 तन ढंक सकते हैं
    1918 में महात्मा गांधी जी अहमदाबाद के एक कारखाने में अंग्रेजी मिलकों के खिलाफ चल रही मजदूरों की लड़ाई में शामिल हुए और कारखाने में उन्होने देखा कि उनकी पगडी में जितना कपडा लगता है, उस कपड़े में चार मजदूर भाईयों के तन ढंक सकते हैं। उसी वक्त से महात्मा गांधी जी ने पगडी का त्याग कर दिया। फिर कहा कि जिस देष में लाखों लोग निर्वस्त्र रहने को मजबूर हों, वहां ऐसी पगडी अधूरी सच्चाई बयां करती है।
  4. 31 अगस्त 1920 में महात्मा गांधी जी ने खादी को अपनाया
    खेड़ा नामक स्थान पर किसानो के सत्याग्रह में महात्मा गांधी जी ने खादी पहनने की शपथ ली। 1920 में अंग्रेजी हुकूमत किसानें को कपास की खेती के लिए मजबूर करती थी जिससे वो कपास विदेश पहुंचाया जा सके। महात्मा गांधी जी उसी वक्त 31 अगस्त 1920 को शपथ लेते हुए कहा- ‘आज के बाद से मैं जिंदगी भर हाथ से बनाए हुए कपड़ों का ही इस्तेमाल करूंगा।’
  5. 22 सितंबर 1921 में महात्मा गांधी जी ने मदुरई में धोती पहनने का प्रण लिया।
    सिंतबर 1921 में महात्मा गांधी जी ट्रेन से मदुरई जा रहे थे तभी उन्होने लोगो से खादी कपड़े पहनने का आग्रह किया। तब लोगों ने गांधी जी से कहा, हम इतने निर्धन हैं कि खादी कपड़े नहीं पहन सकते। उस वक्त महात्मा गांधी जी बनियान, टोपी और धोती में थे। अगले ही दिन मदुरई में जाकर गांधी जी ने मुंडन कराकर छोटी धोती पहन ली। ताकि खुद को सभी लोगो के साथ रख सकें और उसके बाद गांधी जी ने आजीवन कभी धोती के अलावा कोई कपड़ा नही पहना।