U.S. Treasury’s Monitoring List

U.S. Treasury's Monitoring List
सुर्ख़ियों में- U.S. Treasury’s Monitoring List
  • हाल ही में संयुक्त राज्य अमेरिकी के ट्रेजरी विभाग ने भारत को “करेंसी मैनिपुलेटर्स वॉच लिस्ट” में रखा है, इस सूची में भारत के साथ, चीन, जापान, कोरिया, जर्मनी, आयरलैंड, इटली, मलेशिया, सिंगापुर, थाईलैंड और मैक्सिको को भी निगरानी सूची (Monitoring List) में रखा गया है।
  • इससे पहले वर्ष 2019 में संयुक्त राज्य अमेरिकी के ट्रेजरी विभाग ने भारत को अपनी ‘करेंसी मैनिपुलेटर्स वॉच लिस्ट’ में प्रमुख व्यापारिक साझेदारों की सूची से हटा दिया था।
Samyak IAS

करेंसी मैनिपुलेटर्स से तात्पर्य-
  • करेंसी मैनिपुलेटर्स संयुक्त राज्य अमेरिका के ट्रेजरी विभाग द्वारा उन देशों को घोषित किया जाता है, जो अनुचित मुद्रा प्रथाओं जैसे मुद्रा का अवमूल्यन, केन्द्रीय बैंक का दखल या अन्य कोई गतिविधि को अपनाकर डॉलर के मुकाबले अपनी मुद्रा को और व्यापार को कम समय के लिए लाभदायक बनाते हैं।
  • करेंसी मैनिपुलेटर्स के रूप में कोई देश अपनी देश की मुद्रा के मूल्य को कृत्रिम रूप से कम कर देता है और इन अनुचित प्रथाओं का उपयोग करते हुए दूसरे देश की तुलना में लाभ प्राप्त करता है।
  • करेंसी मैनिपुलेटर्स के रूप में मुद्रा का अवमूल्यन एक सबसे महत्वपूर्ण अनुचित प्रथा है जो उस देश की निर्यात लागत को कम करने में सहायक होती है।
करेंसी मेनिपुलेटर के मापदंड-
  • अमेरिका के ट्रेजरी विभाग के अनुसार अगर निम्न तीन मानदंडों में से कोई देश दो मानदंडो को पूरा करता है तो उसे करेंसी मेनिपुलेटर की निगरानी सूची में रखा जाता है-
  • उस देश का अमेरिका के साथ पिछले 12 माह के दौरान द्विपक्षीय व्यापार अधिशेष कम से कम 20 अरब डॉलर का रहा हो।
  • पिछले 12 माह के दौरान उस देश की जीडीपी का 2 फीसदी से ज्यादा चालू खाता अधिशेष रहा हो।
  • 12 महीने की अवधि में उस देश की जीडीपी का 2 फीसदी से ज्यादा विदेशी मुद्रा की शुद्ध खरीद हो।
Samyak IAS

ट्रेजरी विभाग की हालिया रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु-
  • भारत, अपनी मुद्रा-कार्यप्रणालियों के संदर्भ में ‘निगरानी सूची’ में शामिल 11 देशों में से एक है।
  • भारत के अलावा इस सूची में शामिल अन्य 10 देश, चीन, जापान, कोरिया, जर्मनी, आयरलैंड, इटली, मलेशिया, सिंगापुर, थाईलैंड और मैक्सिको हैं।
  • भारत, तीन में से दो मानदडों को पूरा करता है- “व्यापार अधिशेष” मानदंड और “निरंतर, एकतरफा हस्तक्षेप” मानदंड।
भारत पर प्रभाव-
  • इससे भारत की वित्तीयन साख को नुकसान होगा।
  • भारत को वैश्विक व्यापार में गलत व्यापार गतिविधियों को अपनाकर लाभ कमाने वाले देश के रूप में चिन्हित किया जायेगा।
  • भारत के साथ व्यापार करने वाले देशों के मध्य एक नकारात्मक सन्देश जायेगा।
अवमूल्यन-
  • अवमूल्यन से अभिप्राय किसी देश की मुद्रा का बाह्य-मूल्य अर्थात् विदेशी मुद्राओं में मूल्य को एक विचारयुक्त नीति के अन्तर्गत जान-बूझकर कम कर देने से होता है अथवा मुद्राओं की अधिकृत समताओं में कमी करना अवमूल्यन है।
  • अवमूल्यन से किसी देश के निर्यात और आयात पर सीधा प्रभाव पड़ता है।
  • निर्यात पर प्रभाव- अवमूल्यन से किसी देश के निर्यात सस्ते होने से मांग में वृद्धि होती है और निर्यातकों को सहायता मिलती है, व्यापार संतुलन देश के अनुकूल होने लगता है, देश के माल की विदेशों में मांग बढ़ जाती है और देश में कीमत स्तर ऊंचा उठ जाता है।
  • आयात पर प्रभाव- अवमूल्यन से किसी देश के आयात महंगे होने से मांग में कमी होती है और आयातकों को नुकसान उठाना पड़ता है, आयातित माल की कीमतें बढ़ने से उत्पादन-लागत में वृद्धि होती है और उत्पादन लागत में कटौती करनी पड़ती है।
Samyak IAS

निष्कर्ष-
  • अमेरिकी के ट्रेजरी विभाग द्वारा भारत को “करेंसी मैनिपुलेटर्स वॉच लिस्ट” में रखना भारत और अमेरिका के मध्य आपसी आर्थिक रिश्तों में कड़वाहट का कारण बन सकता है और वर्तमान में वैश्विक स्तर पर बढ़ते व्यापार “संरक्षणवाद” को अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा देगा। अमेरिका की भारत के प्रति यह धारणा भारत के निर्यात लाभ हासिल करने के लिये मुद्राओं के अवमूल्यन सहित विदेशी मुद्रा नीतियों के संदर्भ में वित्तीय बाज़ारों में देश की वैश्विक वित्तीय छवि को खराब करेगी। अत: अमेरिका को पुनः इस पर विचार करना चाहिये।