सुर्ख़ियों में- Vaccine Nationalism
- हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा देश से कोरोना महामारी वैक्सीन के निर्यात पर प्रतिबंध लगाए हैं, इसके मद्देनजर The All India People’s Science Network (AIPSN) ने कोरोना वैश्विक महामारी के बीच देशों में बढ़ते वैक्सीन राष्ट्रवाद’ का विचार को गलत बताया है और इस विचार को मानवता के नाते त्याग करने को कहा है।

वैक्सीन राष्ट्रवाद से तात्पर्य-
- वैश्विक कोरोना महामारी के बीच पूरी दुनिया में वैक्सीन के लिए होड़ मची है, और अमीर देश ये सुनिश्चित करने में जुटे हैं कि, वो अपनी आबादी को कई बार टीका लगाने से भी ज़्यादा टीकों की ख़ुराक जुटा लें या उसकी आपूर्ति सुनिश्चित कर लें। वही, ग़रीब देशों के कोविड-19 के टीकों के लिए क़तार में खड़े है। बहुत से विश्लेषक इसे ‘वैक्सीन राष्ट्रवाद’ का नाम दे रहे हैं अर्थात वैक्सीन राष्ट्रवाद की स्थिति में कोई देश किसी वैक्सीन की खुराक को अन्य देशों को उपलब्ध कराने से पहले अपने देश के नागरिकों या निवासियों के लिए सुरक्षित कर लेता है।
- वैश्विक कोरोना महामारी के बीच 4 जनवरी 2021 तक, दुनिया के 30 देशों ने अपने यहां कोविड-19 का टीकाकरण अभियान शुरू कर दिया था, लेकिन, मुट्ठी भर अमीर देशों को छोड़ दें, तो एशिया या अफ्रीका के देशों में टीकाकरण अभियान अभी प्रारम्भ भी नहीं हुआ हैं।
- दुनिया भर में फैले वैक्सीन राष्ट्रवाद के ख़तरे से निपटने के लिए, मध्यम और कम आमदनी वाले देशों की एक ही उम्मीद भारत है, क्योंकि भारत विश्व का सबसे बड़े वैक्सीन निर्माता है।
- वैश्विक कोरोना महामारी के पहले भी वैक्सीन राष्ट्रवाद अनेक प्रकार की बीमारियों के वैक्सीनेशन में प्रबल रहा है।
- सर्वप्रथम एड्स महामारी के बीच बने टीके पर संयुक्त राज्य अमेरिका के द्वारा पूर्व ऑर्डर ने वैक्सीन राष्ट्रवाद को बढ़ावा दिया था।
- वर्ष 2009 में फ़ैली H1N1फ्लू महामारी के आरंभिक चरणों में विश्व के धनी देशों द्वारा H1N1 वैक्सीन निर्माता कंपनियों से खरीद-पूर्व समझौते किये गए थे। उस समय, यह अनुमान लगाया गया था कि, अच्छी परिस्थितियों में, वैश्विक स्तर पर वैक्सीन की अधिकतम दो बिलियन खुराकों का उत्पादन किया जा सकता है।

वैक्सीन राष्ट्रवाद के विपक्ष में तर्क-
- वैक्सीन राष्ट्रवाद की अवधारणा मानवता के खिलाफ है।
- वैश्विक कोरोना महामारी के बीच वैक्सीन राष्ट्रवाद कोरोना महामारी की वैक्सीन हेतु सभी देशों की टीके तक समान पहुंच को रोक देगा जो मानवता के लिए हानिकारक साबित होगा।
- वैक्सीन राष्ट्रवाद कोरोना महामारी काल में मोल-भाव की शक्ति न रखने वाले देशों के लिए अधिक हानिकारक साबित होगा।
- वैक्सीन राष्ट्रवाद अल्प संसाधन रखने वाले देशों के लिए खतरनाक होगा।
- इस वैक्सीन राष्ट्रवाद की अवधारणा के कारण देशों के मध्य आपसी सहयोगी रिश्तों में कटुता आयेगी जो विश्व शांति के लिए घातक होगी।
- यह अवधारणा विश्व को उत्तर(विकसित देश)-दक्षिणी(अल्प-विकसित) भागों में विभाजित कर सकती है, जो विश्व को दो गुटों में बाट देगा।
- किसी राष्ट्र की अवधारणा उसकी जनसंख्या और सम्प्रभु क्षेत्र के साथ जुड़ती है और किसी राष्ट्र की जनसंख्या को बचाना उस देश के शासक या राजनीतिक सत्ता का कर्तव्य है, चाहे इसके लिए कुछ भी करना पड़े।
- किसी देश की जनता द्वारा उस देश की शासन सत्ता को “राष्ट्र हित” के संरक्षण के लिए चुना जाता हे, न की विश्व के हितों को संरक्षण के लिए। अत: देश पहले की अवधारणा प्रबल हो जाती है।
- वर्तमान में कोरोना महामारी के दौरान वैश्विक टीकाकरण की पहल के अर्न्तगत भारत द्वारा अपने पड़ोसी राष्ट्रों को कोरोना वैक्सीन उपलब्ध करवायी जा रही है जो भारत की वैश्विक स्वास्थ्य कूटनीति के तहत वैक्सीन कूटनीति का रूप है।
- इससे पूर्व भी एड्स के प्रकोप से निपटने के लिए भारत ने अफ्रीकी राष्ट्रों को एड्स के उपचारत्मक उपकरण उपलब्ध करवाये थे जो इस प्रकार की नीति का एक भाग था। इस नीति के तहत भारत अपने पड़ोसी राष्ट्रों श्रीलंका, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान व अन्य अफ्रीका राष्ट्रों को कोवैक्सिन व कोविशिल्ड की लाखों डोजो की आपूर्ति कर चुका है।
- वर्तमान में भारत की इस नीति पर सवालिया चिन्ह लग रहे है। हालांकि भारत ग्लोबल अलायंस फॉर वैक्सीन एंड इम्युनाइजेशन (गावी) में एक सक्रिय भागीदार है जो मानवता के लिए कार्य कर रहा है

- GAVI एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन है, यह प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल को मज़बूत करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है और इसके माध्यम से यह संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा निर्धारित सतत् विकास लक्ष्यों के तहत सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के लक्ष्य को प्रप्त करने में सहायता करता है।
- स्थापना- वर्ष 2000 में
- उद्देश्य- विश्व के सबसे गरीब देशों में रह रहे बच्चों के लिये टीकों की पहुँच सुनिश्चित करने के लिये सार्वजनिक और निजी क्षेत्र को साथ लाना है।
- मुख्य भागीदार- WHO, UNICEF, World Bank, Bill & Melinda Gates Foundation

निष्कर्ष-
- कोरोना महामारी की रोकथाम के कारण उत्पन्न हुयी वैक्सीन राष्ट्रवाद की अवधारणा मानवता के लिए घातक सिद्ध होगी क्योंकि मानवमात्र की अवधारणा देशों से बढ़ी अवधारणा है मगर अनेक देशों की सरकारें इस बात से चिंतित है की उनके देशों की जनता अब खुद “वैक्सीन राष्ट्रवाद की अवधारणा” को आगे रख रही है।
- निष्कर्षत: “वैक्सीन राष्ट्रवाद की अवधारणा” को सीमित अर्थों में लेते हुये वैश्विक स्तर पर टीकों के उत्पादन में तीव्रता लानी चाहिये और GAVI जैसी पहलों कों मानवता के लिए बढ़ावा देना चाहिये।