Reservation in Private Sector Jobs

Reservation in Private Sector Jobs
सुर्ख़ियों में- Reservation in Private Sector Jobs
  • हाल ही में हरियाणा सरकार के स्थानीय लोगों के लिए निजी क्षेत्र की नौकरियों में आरक्षण की घोषणा के बाद झारखंड सरकार द्वारा भी स्थानीय लोगों के लिए निजी क्षेत्र की नौकरियों में 75% आरक्षण की घोषणा की गई है।
  • हालांकि स्थानीय बेरोजगारों के लिए निजी क्षेत्र की नौकरी में 75% का आरक्षण, सिर्फ 30 हजार तक की सैलरी पा रहे लोगों के लिए ही मान्य होगा।
  • निजी क्षेत्र में झारखंड सरकार आरक्षण तो दे देगी लेकिन जिस जगह कुशल लेबर की जरूरत होगी तब सरकार निजी कंपनी या फैक्ट्री को वैसा मैनपावर कैसे उपलब्ध करवायेगीं।
  • सरकार द्वारा जारी घोषणा में ‘निजी क्षेत्र की नौकरियों’को निम्न प्रकार से परिभाषित किया गया है- दुकानों, प्रतिष्ठानों, खदानों, उद्यमों, उद्योगों, कंपनियों, सोसाइटीज, ट्रस्टों, सीमित देयता भागीदारी फर्मों, तथा दस या अधिक व्यक्तियों को नियोजित करने वाले व्यक्ति को निजी क्षेत्र माना गया।
पूर्व में अन्य राज्यों द्वारा कि गयी इस प्रकार की घोषणायेँ निम्न है-
  • महाराष्ट्र सरकार ने नवंबर 2008 में स्थानीय लोगों के लिए 80 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था की थी। यह व्यवस्था केवल उन्हीं उद्योगों पर लागू की गई थी जो सरकार से टैक्स सब्सिडी और इंसेंटिव चाहते थे। हालांकि, इस व्यवस्था को कभी अमल में नहीं लाया जा सका।
  • जनवरी 2019 में तमिलनाडु के उद्योग मंत्री ने राज्य के लोगों के लिए 50 फीसदी आरक्षण देने का वादा किया था। हालांकि ये अभी तक लागू नहीं हुआ है।
  • कर्नाटक की सरकार ने भी दिसंबर 2016 में स्थानीय लोगों को रोजगार में आरक्षण देने की योजना बनाई थी। इस व्यवस्था को अभी तक अमल में नहीं लाया जा सका है।
  • बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी प्राइवेट सेक्टर में आरक्षण की मांग पहले ही कर चुके हैं।
  • आंध्रप्रदेश देश का इकलौता राज्य है जहां प्राइवेट नौकरियों में 75% आरक्षण स्थानीय लोगों के लिए है।
  • हाल ही में हरियाणा सरकार ने भी स्थानीय लोगों के लिए निजी क्षेत्र की नौकरियों में आरक्षण की घोषणा की है।
विधेयक के प्रमुख बिंदु:
  • तीन महीने के भीतर सभी नियोक्ताओं को, 30, 000 रुपये से कम कुल मासिक वेतन या मजदूरी पाने वाले कर्मचारियों को एक निर्दिष्ट पोर्टल पर पंजीकृत करना होगा।
  • किसी भी व्यक्ति को तभी काम दिया जायेगा जब काम करने वाला व्यक्ति निर्दिष्ट पोर्टल पर खुद का पंजीकरण पूरा करवायेगा।
  • स्थानीय उम्मीदवारों के लिए खुद को पोर्टल पर पंजीकृत करना आवश्यक होगा।
  • स्थानीय उम्मीदवारों में कौशल योग्यता का अभाव होने पर नियोक्ता द्वारा इस संबंध में छूट का दावा किया जा सकता है।
  • नियोक्ता प्रति तिमाही पर रिक्तियों और रोजगार के बारे में पोर्टल पर जानकारी देगा।
  • इस विधेयक के विषय में जांच एक प्राधिकृत अधिकारी द्वारा की जाएगी।
नीति से संबंधित मुद्दे-
  • इस नीति के परिणामस्वरूप क्षेत्रवाद की भावना को बल मिलेगा।
  • यह नीति देश की “विविधता में एकता” पर प्रभाव डालेगी।
  • यह नीति संविधान के अनुच्छेद-16 से सबंधित संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन करती है।
  • इस नीति से देश में “स्थानीय बनाम गैर-स्थानीय” की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
  • भारत में इससे पूंजी निवेश हतोत्साहित हो सकता है।
  • भारत के संविधान में उल्लेखित व्यवसाय की स्वतंत्रता जैसे मौलिक अधिकार कम होगे।
  • इससे राज्यों के बीच में नकारात्मक प्रतिस्पर्धा की भावना को बढ़ावा मिलेगा।