Universal Basic Income

Universal Basic Income
सुर्ख़ियों में- Universal Basic Income
  • हाल ही में तृणमूल कांग्रेस पार्टी ने विधानसभा चुनावों के लिए जारी घोषणापत्र में प्रत्येक परिवार के लिए यूनिवर्सल बेसिक इनकम (Universal Basic Income) देने का वादा किया है।
  • योजना के तहत, सामान्य श्रेणी के परिवारों के लिए 500 रुपए प्रति माह तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के परिवारों को 1,000 रुपए प्रति माह प्रदान किये जाएँगे।
  • यह यूनिवर्सल बेसिक इनकम की राशि परिवार की “महिला मुखिया” के नाम पर सीधे खाते में ट्रांसफर की जाएगी।
भारत में इस अवधारणा की उत्पति-
  • भारत में इस अवधारणा की उत्पति अर्थशास्त्री सुरेश तेंदुलकर के द्वारा की गयी थी। सुरेश तेंदुलकर ने देश के गरीब लोगों को पोषण युक्त भोजन खाने के लिए या गरीबी रेखा से बाहर निकालने के लिए प्रति व्यक्ति न्यूनतम प्रति माह 635 रुपए देने की सिफारिश की थी।
  • सुरेश तेंदुलकर की इसी सिफारिस को ध्यान में रखकर यूनिवर्सल बेसिक इनकम का विचार भारत में पनपा था।
  • केंद्रीय आर्थिक सर्वेक्षण 2016-17 में यूनिवर्सल बेसिक इनकम (Universal Basic Income)की अवधारणा का समर्थन किया गया था।
  • नवउदारवादी अर्थव्यवस्था के प्रमुख अर्थशास्त्री मिल्टन फ़्रीड्मन ने भी अपनी किताब ‘कैपिटलिज्म एण्ड फ़्रीडम’में यूनिवर्सल बेसिक इनकम की अवधारणा का समर्थन किया था।
यूनिवर्सल बेसिक इनकम का अर्थ-
  • यूनिवर्सल बेसिक इनक़म का मतलब है कि सभी वर्ग के लोगों को बिना उनकी उम्र, सम्पत्ति, रोज़गार, परिवार आदि को देखे हुए कुछ पैसा दिया जाए, जिसको वो अपनी इच्छानुसार ख़र्च कर सकें।
  • हालांकि आज के परिपेक्ष्य में इसे केवल ग़रीबों, बुज़ुर्गों, विधवाओं और बेसहारा आदि लोगों के लिए ही लागू करने के लिए कहा जाता है।
  • यूनिवर्सल बेसिक इनकम की अवधारणा के पीछे मुख्य विचार, गरीबी कम करना अथवा रोकना और नागरिकों में समानता की वृद्धि करना है।
यूनिवर्सल बेसिक इनकम के पीछे अवधारणाएं-
  • यूनिवर्सल बेसिक इनकम के पीछे तीन अवधारणाएं हैं जो निम्न है-
  • यूनिवर्सल बेसिक इनकम से सभी के पास कुछ न कुछ पैसा होगा तो उससे लोगों की क्रय शक्ति बढ़ेगी, जिससे बाज़ार में डिमांड बढ़ेगी, जिसे पूरा करने के लिए उत्पादन बढ़ेगा, व्यापार में वृद्धि आएगी, रोज़गार सृजित होंगे, विकास को गति मिलेगी और कुल मिलाकर विभिन्न प्रकार के टैक्सों से सरकार की भी आमदनी बढ़ेगी।
  • बेसिक इनकम से वंचित व्यक्ति पैसा नहीं होने की वजह से तमाम ग़लत निर्णय लेता है, मसलन बच्चों को ठीक से ना पढ़ाना, पौष्टिक भोजन न करना, क्राइम की दुनिया में चले जाना आदि। इन सबका कुल परिणाम यह होता है कि पूरे समाज की सुख, शांति और समृद्धि पर असर पड़ता है। ऐसे में अगर व्यक्ति को रोज़मर्रा की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए कुछ पैसे मिल जाएँगे तो वह इन सब कामों में नहीं लगेगा, जिससे सरकार को पुलिस, नौकरशाही आदि पर ज़्यादा ख़र्च नहीं करना पड़ेगा।
  • यूनिवर्सल बेसिक इनकम विश्व में तकनीकी में उन्नति के कारण नयी तकनीकी को तेज़ी से नहीं अपना पाने की वजह से बड़ी संख्या में बेरोज़गार हुये लोगों को राहत देती है, जिससे उनके मन में असंतोष ना पैदा हो।
यूनिवर्सल बेसिक इनकम के घटक-
  • यूनिवर्सल बेसिक इनकम के निम्न घटक है-
  • यह इनकम सभी नागरिकों को प्राप्त होगी जो इसकी सार्वभौमिकता को उल्लेखित करता है।
  • यूनिवर्सल बेसिक इनकम बिना किसी पूर्व शर्त के प्रदान की जाती है।
  • यह इनकम नियमित अंतराल पर आवधिक भुगतान के रूप में प्राप्त होगी जो इसकी आवधिक विशेषता को उल्लेखित करती है।
  • यूनिवर्सल बेसिक इनकम नकद हस्तांतरण के रूप में होती है अर्थात यह कोई फ़ूड वाउचर या सर्विस कूपन नहीं होगा।
यूनिवर्सल बेसिक इनकम (Universal Basic Income) के लाभ-
  • इससे लोगों के हाथों में अतिरिक्त क्रय क्षमता होगी जो उत्पादनकारी गतिविधियों को बढ़ावा देने में सहायक होगी।
  • यह इनकम सभी नागरिकों को प्राप्त होगी। अत: इसमें लाभार्थियों को चिन्हित नहीं करना पड़ेगा।
  • वर्तमान में सरकार विभिन्न सामाजिक कल्याण योजनाओं के माध्यम से लोगों के कल्याण की प्रवृत्ति अब बदलना चाहती है ताकि लोग अपनी पसंद की सेवाएं / सामान खरीद सकें।
  • इससे व्यक्तियों को सुरक्षित और फिक्स्ड इनकम प्राप्त होगी।
  • इससे देश में गरीबी और आर्थिक असमानता को कम करने में मदद मिलेगी।
यूनिवर्सल बेसिक इनकम का विरोध-
  • यूनिवर्सल बेसिक इनकम की धारणा का लोग विचारधारा के आधार विरोध कर सकते है क्योंकि यह अवधारणा नवउदारवाद का रूप है।
  • इस नीति का विरोध करप्ट राजनेताओं और नौकरशाहों का समूह भी कर सकता है
  • उच्च वर्ग के लोग जो ग़रीबी और असमानता को मिटाने के लिए आ रहे नए विचारों को अपनाने के लिए तैयार नहीं हैं। ऐसे लोग विरोध में खड़े हो सकते हैं।
यूनिवर्सल बेसिक इनकम लागू करने में चुनौतियां-
  • भारत सरकार और राज्य सरकार के कोष पर भारी व्यय आयेगा जो सरकार के लिए मुश्किल होगा।
  • इस कार्यक्रम के कार्यान्वयन हेतु प्रमुख चुनौती के रूप में राजनीतिक इच्छाशक्ति को देखा जाता है।
  • यूनिवर्सल बेसिक इनकम लोगों को आलसी बना सकती है।