Agricultural and Allied Sectors (कृषि और सम्बद्व क्षेत्र)

Helping farmers grow in income

किसानों की आय बढ़ाने में मददगार

देश के कुल निर्यात में 16 प्रतिशत हिस्सा कृषि से प्राप्त होता है। आज भी देश की लगभग आधी श्रमशक्ति कृषि एवं सम्बद्व क्षेत्रों में ही लगी हुई है। आर्थिक सर्वे में साल 2018-19 में देश की आर्थिक वृद्वि दर 7 से 7.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। वर्ष 2016-17 में कृषि विकास दर 4.9 प्रतिशत थी। वर्ष 2016-17 के आर्थिक सर्वेक्षण के आधार पर कृषि एवं सम्बद्व क्षेत्रों का देश के सकल घरेलू उत्पाद जीडीपी में 17.8 प्रतिशत योगदान है। भारत आज 27.658 करोड़ टन खाद्यान्नों का उत्पादन कर रहा है। भारत इस समय दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सब्जी और फल उत्पादक देश बन गया है। भारत विश्व में मसालों का सबसे बड़ा उत्पादक व निर्यातक है। भारत 16.5 करोड़ टन के साथ विश्व दुग्ध उत्पादन में 19 प्रतिशत का योगदान देता है। कुक्कुट पालन में भारत विश्व में सातवें स्थान पर है। वही मछली उत्पादन में भारत का दूसरा स्थान है।

सरकारी प्रयास व योजनाएं:- बजट 2018-19 में सरकार ने किसानों को उत्पादन लागत का डेढ़ गुना कीमत देना तय किया गया है। आलू, प्याज और टमाटर की कीमतों में उतार-चढ़ाव की समस्या से बचने के लिए ‘आॅपरेशन ग्रीन’ योजना शुरू की है।

राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान करनाल, केन्द्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान हिसार, राष्ट्रीय ऊंट अनुसंधान केन्द्र बीकानेर, राष्ट्रीय मांस अनुसंधान केन्द्र हैदराबाद तथा राष्ट्रीय पशु परियोजना निदेशालय हैदराबाद व मेरठ पशुपालन-डेयरी उद्योग के बारे में तकनीकी जानकारी व अल्पकालीन प्रशिक्षण उपलब्ध कराते हैं।

मुर्गी परियोजना निदेशालय हैदराबाद, केन्द्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान इज्जतनगर, बरेली, भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान इज्जतनगर मुर्गी पालन संबधी सहायता उपलब्ध कराते हैं।

यार्कशायर, बर्कशायर एवं हैम्पशायर सुअर की अच्छी नस्लें हैं। राष्ट्रीय सुअर अनुसंधान केन्द्र, रानी, गुवाहाटी सुअर पालन के बारे में तकनीकी जानकारी व प्रशिक्षण उपलब्ध कराता है।

ताजे जल की मछलियों के केन्द्रीय अनुसंधन संस्थान भुवनेश्वर, केन्द्रीय अंतर-स्थलीय मत्स्य अनुसंधन संस्थान बैरकपुर, केन्द्रीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान मुम्बई तथा केन्द्रीय मत्स्य तकनीकी संस्थान कोचीन मछली उद्योग के बारे में तकनीकी जानकारी व प्रशिक्षण उपलब्ध कराता है।

केन्द्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान अविकानगर, जयपुर तथा केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान मथुरा भेड़-बकरी पालन के कृषि मंत्रालय द्वारा 2014-15 में राष्ट्रीय पशुधन मिशन शुरू किया गया। नाबार्ड द्वारा 19 अप्रेल, 2012 से राष्ट्रीय डेयरी योजना शुरू की गई। 2005-08 के वर्षों में पशुधन बीमा योजना शुरू की गई थी, जो प्रारम्भ में 100 जिलों तक सीमित थी। अब यह गोवा को छोड़कर सभी राज्यों में चलाई जा रही है। इसके अलावा नेशनल प्रोग्राम फाॅर बोवाइन एंड डेयरी डेवलपमेंट के तहत राष्ट्रीय गोकुल मिशन की शुरुआत की गई, जिसका उद्देश्य पशु की देशी नस्ल जैसे बदरी, गिर, राठी, साहीवाल आदि का संरक्षण व विकास करना है। बजट 2018-19 के तहत गोबरधन योजना शुरू की गई है। इस योजना के अन्तर्गत पशुओं के गोबर और खेतों के ठोस अपशिष्ट पदार्थों को बायोगैस और बायो सीएनजी में परिवर्तित किया जाएगा।

नस्ल पंजीकरण:- पशु आनुवांशिक संसाधन राष्ट्रीय ब्यूरो, करनाल में वर्ष 2007 से पशु नस्लों के पंजीकरण की व्यवस्था की गई है।