Prime Minister Narendra Modi’s Visit to Bangladesh

Prime Minister Narendra's Modi's Visit to Bangladesh
सुर्ख़ियों में- Prime Minister Narendra’s Modi’s Visit to Bangladesh
  • हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बांग्लादेश के दो दिन के विदेश दौरे पर गए हैं। कोरोना और लॉकडाउन के बाद यह प्रधानमंत्री मोदी का पहला विदेश दौरा है। सांस्कृतिक और कूटनीति के लिहाज से यह दौरा काफी अहम माना जा रहा है।
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना के निमंत्रण पर 26-27 मार्च को बांग्लादेश के दौरे पर है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बांग्लादेश के राष्ट्रीय दिवस समारोह में भी शिरकत की।
बांग्लादेश-
  • बांग्लादेश दक्षिण एशिया का एक राष्ट्र है। बांग्लादेश और भारतीय राज्य पश्चिम बंगाल एक बांग्लाभाषी अंचल, बंगाल था, जिसका ऐतिहासिक नाम बंग या बांग्ला था।
  • वर्तमान में जो बांग्लादेश है, वह कई वर्षों पूर्व भारत के बंगाल का हिस्सा था। वर्ष 1947 में जब भारत और पाकिस्तान ने आज़ादी प्राप्त की तो बंगाल का यह मुस्लिम बहुल क्षेत्र पाकिस्तान का हिस्सा बन गया और उसे ‘पूर्वी पाकिस्तान’ कहा जाने लगा।
  • पूर्वी पाकिस्तान भौगोलिक रूप से समकालीन पाकिस्तान से अलग था व जातीयता और भाषा के आधार पर भी पाकिस्तान से अलग था। इस विषमता के कारण जल्द ही पूर्वी पाकिस्तान में संघर्ष शुरू हो गया।
  • वर्ष 1970-71 के संसदीय चुनावों में पूर्वी पाकिस्तान के अलगाववादी दल अवामी लीग ने उस क्षेत्र को आवंटित सभी सीटें जीत लीं। पूर्वी पाकिस्तान और पश्चिमी पाकिस्तान के मध्य वार्ता की विफलता के पश्चात् 27 मार्च, 1971 को शेख मुजीबुर रहमान ने पाकिस्तान से बांग्लादेश की स्वतंत्रता की घोषणा कर दी। भारत ने बांग्लादेशियों का समर्थन करने के लिये अपनी शांति सेना भेज दी।
  • 11 जनवरी, 1972 को लंबे संघर्ष के पश्चात् बांग्लादेश एक स्वतंत्र संसदीय लोकतंत्र बन गया।
भारत-बांग्लादेश के रिश्ते
संबंधो का इतिहास-
  • भारत-बांग्लादेश का साझा इतिहास रहा हैं। 1971 में भारत ने बांग्लादेश की स्वतंत्रता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
  • भारत बांग्लादेश के ‘सदाबहार मित्र’ के रूप में उभरा है क्योंकि भारत का क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रभाव बढ़ रहा है, जिसे नजर अंदाज नहीं किया जा सकता है।
भारत-बांग्लादेश के मध्य सीमा सुरक्षा और प्रबंधन-
  • भारत की बांग्लादेश के साथ 4096.7 किलोमीटर लंबी भूमि सीमा की साझेदारी है। पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, त्रिपुरा एवं मिजोरम राज्य बांग्लादेश के साथ सीमा की साझेदारी करते हैं-
    1. पश्चिम बंगाल- 2216.70 Km
    2. असम- 263 Km
    3. मेघालय- 443 Km
    4. त्रिपुरा- 856 Km
    5. मिजोरम- 318 Km
  • वर्ष 2015 में भारत-बांग्लादेश भूमि सीमा समझौता (India-Bangladesh Land Boundary Agreement-LBA) लागू हुआ था और 31 जुलाई, 2015 को भूभागीय मानचित्र पर हस्ताक्षर किये गए थे।
  • वर्ष 2011 में समन्वित सीमा प्रबंधन योजना, को हस्ताक्षरीत किया गया था। इसके तहत सीमा पार अवैध गतिविधियों और अपराधों की जाँच करने तथा भारत-बांग्लादेश सीमा पर शांति बनाए रखने हेतु दोनों सीमा सुरक्षा बलों द्वारा समन्वित प्रयास किये जायेगे।
  • पूर्व के वर्षों में “भूमि सीमा करार”(Land boundary agreement-LBA) के तहत 111 सीमावर्ती एंक्लेव बांग्लादेश को जबकि बदले में 51 एंक्लेव भारत का हिस्सा बने थे।
जल संसाधन-
  • भारत और बांग्लादेश आपस में 50 से अधिक नदियाँ साझा करते हैं।
  • भारत –बांग्‍लादेश संयुक्‍त नदी आयोग (जेआरसी) सन् 1972 से ही कार्य कर रहा है। सामान्‍य नदी प्रणालियों से अधिकतम लाभ पाने में प्रभावी संयुक्‍त प्रयास को सुनिश्‍चित करने के लिए संपर्क बनाए रखने के विचार से इसकी स्‍थापना की गयी थी। जेआरसी की अध्‍यक्षता दोनों ही देशों के जल संसाधन मंत्रालयों द्वारा की जाती है।
द्विपक्षीय व्यापार और निवेश-
  • भारत और बांग्लादेश के बीच 1972 में पहला व्यापार समझौता हुआ था। भारत-बांग्लादेश व्यापार समझौते को अंतिम बार जून 2015 में स्वतः नवीनीकरण के प्रावधान के साथ 5 वर्षों की अवधि के लिये नवीनीकृत किया गया था।
  • वित्त वर्ष 2019-20 में बांग्लादेश और भारत के बीच द्विपक्षीय व्यापार 6.9 बिलियन डॉलर रहा। इसमें बांग्लादेश ने 5.79 बिलियन डॉलर का आयात किया और 1.10 बिलियन डॉलर का निर्यात किया।
आर्थिक सहयोग-
  • वर्ष 2010 से अब तक भारत ने बांग्लादेश को 8 बिलियन डॉलर(लगभग) की 3 लाइन ऑफ क्रेडिट (LOC) दी हैं-
    1. वर्ष 2010 – 1 बिलियन डॉलर की
    2. वर्ष 2015- 2 बिलियन डॉलर की
    3. वर्ष 2017- लगभग 4.5 मिलियन डॉलर की
  • हालांकि भारत द्वारा बांग्लादेश को अब तक दी गयी लाइन ऑफ क्रेडिट (LOC) का पूरा उपयोग नहीं किया गया है।
  • ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग-
    • वर्तमान में भारत द्वारा बांग्लादेश को बिजली की आपूर्ति की जाती है और हाल ही में भारत की सार्वजनिक व निजी कंपनियों और बांग्लादेश के बिजली उत्पादन,आपूर्ति व वित्तपोषण के भी समझौतों हुये है।
    • तेल और गैस क्षेत्र में भारतीय सार्वजानिक क्षेत्र की इकाई इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने बांग्लादेश की सरकार के साथ काम करने का करार किया हैं।
    भारत-बांग्लादेश के रिश्तों के मध्य तनाव के कारण और चिंताएँ-
    तीस्ता नदी जल साझाकरण समझौता
    • भारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता नदी जल साझाकरण समझौता असफल रहा हैं, जो वर्ष 2011 से लगातार चल रहा है।
    • तीस्ता नदी जल साझाकरण समझौता भारत की केंद्र और पश्चिम बंगाल सरकारों के बीच तनाव के कारण अब तक आगे नहीं बढ़ पाया है।
    भारत-बांग्लादेश की सीमा पर बी.एस.एफ़. की एकतरफा कारवाई-
    • भारत-बांग्लादेश सीमा पर अवैध घुसपेठ करने वाले लोगों पर बी.एस.एफ़. की ओर से फायरिंग में अक्सर बांग्लादेशी लोग मर जाते है जो बांग्लादेश के लिए एक इमोशनल मुद्दा है।
    • वर्ष 2019 के अक्टूबर माह में भारत-बांग्लादेश सीमा पर बांग्लादेशी सेना की ओर की गई फायरिंग में भी बीएसएफ का एक जवान शहीद हो गया था जो भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में तल्खी का कारण बन गया था।
    बांग्लादेश के लिए भारत द्वारा आर्थिक नीति में भेदभाव-
    • बांग्लादेश के वाणिज्यक विभाग द्वारा अक्सर भारत सरकार के ऊपर आर्थिक नीति में बाज़ार-विरोधी रुझान के आरोप लगाये जाते है और भारत में बांग्लादेश के घटते निर्यात का एक कारण बांग्लादेश भारत की आर्थिक नीति में बाज़ार-विरोधी रुझान को भी बताता है।
    एनआरसी का मुद्दा-
    • हाल ही में भारत सरकार के मंत्रियों द्वारा NRC पर की गयी टिप्पणियॉ जैसे- बांग्लादेशी लोगों को दीमक कहना, आदि के कारण बांग्लादेश के लोग चिंतित है।
    • इससे पूर्व बांग्लादेशी पक्ष ने NRC के संबंध में अपनी चिंताएँ भी ज़ाहिर की थी। भारत की ओर से आने वाले बयानों की माने तो अवैध घुसपेठ से आये लोगों को वापस निर्वासित कर दिया जाएगा। इससे बांग्लादेश की सरकार चिंतित नजर आती है।
    लाइन ऑफ क्रेडिट (LOC) का मुद्दा-
    • बांग्लादेश की सरकार ने भारत द्वारा दी गयी लाइन ऑफ क्रेडिट में भारत सरकार के “लाल फीताशाही” के मुद्दे को लेकर भारत सरकार के समक्ष अपनी चिंताएँ जाहिर की है और यही कारण है की बांग्लादेश आज तक लाइन ऑफ क्रेडिट का पूरा उपयोग नहीं कर पाया है।
    निष्कर्षत: वर्तमान समय में भारत और बांग्लादेश के मध्य संबंध काफी अच्छे हैं, परंतु फिर भी कुछ चिंताएँ बनी हुई हैं जिन्हें जल्द-से-जल्द समग्र रूप से संबोधित किया जाना आवश्यक है ताकि दोनों पड़ोसियों के बीच अच्छे संबंध कायम रहे।